मरवाही वन मंडल की दुर्दशा: कटाई 25%, रोपण 75% फेल — जंगल की जुबानी मुख्यमंत्री के सामने उठेगा जंगल कटाई और फर्जी प्लांटेशन का मुद्दा
ग्रीष्मी चांद के कार्यकाल में अवैध कटाई और विभागीय अनियमितताओं की शिकायतें बढ़ीं?

मरवाही। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही वन मंडल में कथित अवैध कटाई, फर्जी प्लांटेशन और वन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर अब मामला प्रदेश स्तर तक पहुंचने लगा है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने संकेत दिए हैं कि यह मुद्दा कल सुशासन तिहार के दौरे के दौरान मुख्यमंत्री के समक्ष उठाया जाएगा।
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ग्रामीणों का आरोप है कि ग्रीष्मी चाँद के डीएफओ मरवाही बनने के बाद से अब तक जंगलों की लगातार कटाई हुई, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। दूसरी ओर कैंपा मद और ग्रीन क्रेडिट योजना के तहत करोड़ों रुपये खर्च कर किए गए पौधारोपण को कागजों में सफल बताया गया, जबकि जमीनी स्तर पर बड़ी संख्या में पौधे नष्ट हो चुके हैं।

जंगलों का अस्तित्व खतरे में?
मरवाही के GPM (गौरेला-पेंड्रा-मरवाही) क्षेत्र में वनों की स्थिति लगातार चिंताजनक होती जा रही है। अवैध कटाई, कागजी प्लांटेशन और जिम्मेदार अधिकारियों की निष्क्रियता ने पूरे मरवाही वन मंडल के अस्तित्व पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सोशल मीडिया और स्थानीय समाचार पत्रों में कई बार अवैध कटाई के मामले प्रमुखता से उठाए गए, लेकिन जांच केवल फाइलों तक सीमित रह गई। न किसी अधिकारी की जवाबदेही तय हुई और न ही कोई ठोस कार्रवाई दिखाई दी।ग्राउंड जीरो पर स्थिति कुछ और ही कहानी बयान कर रही है। स्थानीय लोगों और निरीक्षण में सामने आया कि वर्ष 2023 से अब तक जंगलों की लगभग 25 प्रतिशत तक कटाई हो चुकी है। यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले वर्षों में वन्य जीव केवल इतिहास और किताबों में ही दिखाई देंगे।
कागजों में सफल, जमीन पर फेल प्लांटेशन
वन विभाग द्वारा कैंपा मद और ग्रीन क्रेडिट योजना के तहत किए गए पौधारोपण को कागजों में 100 प्रतिशत सफल बताया गया, लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग दिखाई दे रही है।
जानकारी के अनुसार 2022 से अब तक लगाए गए लगभग 75 प्रतिशत पौधे नष्ट हो चुके हैं या अस्तित्व में ही नहीं हैं। कई जगहों पर केवल गड्ढे खोदकर और कागजों में संख्या बढ़ाकर करोड़ों रुपये खर्च दिखा दिए गए। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि इन योजनाओं का लाभ जंगलों को नहीं बल्कि अधिकारियों और ठेकेदारों की जेबों को मिला। यदि पिछले वर्षों के प्लांटेशन का निष्पक्ष भौतिक सत्यापन कराया जाए तो बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार उजागर हो सकता है।
वन्य जीवन पर मंडराता खतरा
लगातार कटते जंगलों के कारण जैव विविधता प्रभावित हो रही है। वन्य प्राणियों का प्राकृतिक आवास सिकुड़ता जा रहा है। जंगलों के खत्म होने से पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ रहा है और आने वाले समय में इसका सीधा असर जल स्रोतों, तापमान और ग्रामीण जीवन पर पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा गंभीर संकट में पड़ सकती है।
डीएफओ के कार्यकाल पर भी उठे सवाल
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ग्रीष्मी चांद के कार्यकाल में अवैध कटाई और विभागीय अनियमितताओं की शिकायतें बढ़ीं। ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय निगरानी कमजोर रही और शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।हालांकि इन आरोपों पर वन विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है। निष्पक्ष जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
अब जरूरी है जवाबदेही
स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने अब मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज कर दी है। मुख्यमंत्री के समक्ष निम्न मांगें उठाई जा सकती हैं:
- 2023 से अब तक हुए सभी प्लांटेशन का भौतिक सत्यापन
- अवैध कटाई में शामिल लोगों की पहचान
- जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई
- ड्रोन और सैटेलाइट सर्वे से वन क्षेत्र का आकलन
- ग्राम स्तर पर वन सुरक्षा समितियों को सक्रिय करना
- वन संरक्षण योजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना
यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो मरवाही वन मंडल का विशाल वन क्षेत्र धीरे-धीरे समाप्त होने की कगार पर पहुंच सकता है।










